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गली गली में चोर है

Posted On: 19 Mar, 2012 Others में

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आनंद वर्मा जी, बड़े ही सज्जन पुरुष हैं. सदर के तेली मोहल्ले में अपने संयुक्त परिवार में रहते हैं. उम्र करीब 40 साल. प्राइवेट नौकरी है तो घर-परिवार को पालने की जद्दोजहद में दिन कैसे गुजर जाता है पता नहीं चलता. अचानक उनसे नुक्कड़ की चाय की दुकान पर मुलाकात हुई तो उन्होंने अपने घर से लेकर ऑफिस पहुंचने तक की दूरी में मिलने वाले चोरों से मेरा भी परिचय करा दिया. आइए आपको भी बताते हैं वर्मा जी को रोजाना किन-किन चोरों से सामना करना पड़ता है…
1. दूध वाला – घर में दो लीटर दूध आता है. यकीन मानिए पक्का चोर आधे लीटर से ज्यादा तो पानी मिलाता है. कई बार कह चुका. मानता ही नहीं. एक बार तो मैंने खुद जाकर अपने सामने भैंस से दूध निकलवाया. उसमें भी मिलावट. चोरी की आदत तो पड़ गई है.

2. सब्जी वाला – सभी को सुबह सब्जी चाहिए. सभी की अपनी अलग-अलग ख्वाहिश. सुबह सभी को जल्दी भी तो होती है. मंडी जाने का भी समय नहीं होता. घर के पास ही से सब्जियां खरीदनी पड़ती हैं. आग लगे सब्जी वाले को मंडी से लाकर दोगुने रेट पर बेचता है. दो-तीन रुपए की बात अलग होती है. हैं न ये भी चोर.

3. गैस सिलेंडर – वैसे ही गैस सिलेंडरों पर सरकार ने आग लगाई हुई है. जब एजेंसी वाले को देख लेता हूं तो मेरे तन बदन में आग लग जाती है. हर बार इसके सिलेंडर से दो तीन किलो गैस कम निकलती है. कभी-कभी तो सुबह की चाय भी नसीब नहीं होती है. अब आप ही बताइए इतने महंगे सिलेंडर में भी चोरी होने लगे तो कैसा लगेगा?

4. पैट्रोल पंप – पिछले 15 सालों से स्कूटर चला रहा हूं. पैट्रोल की कीमतों को जितनी तेजी से ऊपर जाते देखा है उससे दोगुनी तेजी से पैट्रोल की क्वालिटी के गिरते स्तर को देखा है. उसके बाद ये पंप वाले उसमें भी आधे लीटर का टांका लगाते हैं. भइया, बस नहीं चलता इनका. पैट्रोल की जगह पानी बेचने लगे. खुलेआम चोरी है.

5. किराना की दुकान – नुक्कड़ में उस बनिए को तो जानते हो न. अरे वही जो पूरे मोहल्ले में ठग्गु लाला के नाम से मशहूर है. जैसा नाम वैसा काम. अब कोई आसपास सामान खरीदने की दुकान भी तो नहीं है. उससे बड़ा चोर तो मैंने आज तक नहीं देखा. चावल, तेल, दाल सभी में मिलावट. सामान का बिल मांगों तो झगडऩे लगता है.

6. रेलवे स्टेशन – यहां तो भांति-भांति के चोर मिलेंगे आपको. टिकट काउंटर से लेकर प्लेटफॉर्म और अंदर ट्रेन तक. मुझे हमेशा ब्लैक में टिकट लेनी पड़ती है. प्लेटफॉर्म का सामान इतना महंगा कि पूछो मत. उसके बाद आपके पास आईडेंटीफिकेशन कार्ड नहीं है तो चेकर की मुट्ठी गर्म करो. भईया चोर हमेशा कदम कदम पर हैं.

7. ट्रैफिक पुलिस – रोज देखता हूं भाई साहब चोरों की जमात दुकानों और नुक्कड़ों में ही नहीं रेड लाइट में भी मौजूद हैं. हेलमेट न लगाने वालों का मैंने तो कभी काटते देखा नहीं, बस लोगों को रोकते ही देखा है. उसके बाद चौकी में जाकर अपनी जेबें गर्म करते हैं. अरे भाई चालान काटो. क्यों किसी की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हो.

8. स्कूल का एडमिशन – हाल में मैंने अपने भतीजे का स्कूल में एडमिशन कराया है. सारा भ्रम उतर गया. कौन कहता है इन्हें शिक्षा का मंदिर? किराने की दुकान से भी खराब स्थिति है. एडमिशन में डोनेशन के नाम पर लोगों की जेबों काटना इनका धंधा बन गया. उसके बाद किसी न किसी बहाने कुछ न कुछ खर्चा कराते ही रहते हैं.

9. यूनिवर्सिटी में भी – यूनिवर्सिटी का हाल तो और भी बुरा है. मेरी बेटी ने बीएड किया है. टीईटी में आवेदन करने के लिए प्रोविजनल सर्टीफिकेट की जरुरत थी. फॉर्म जमा करने के एक महीने बाद भी सर्टीफिकेट नहीं मिला. फॉर्म ही गायब कर दिया गया. बाद में कर्मचारी को एक हजार रुपए देकर सर्टीफिकेट बनवाया.

10. गली का बल्ब – हद तो तब हो गई जब मैंने गली से अंधेरे को मिटाने के लिए एक बल्ब लगा दिया था. कुछ गलत तो किया नहीं था. सभी आते जाते हैं. एक दो लोगों को चोट भी लग गई थी. डिपार्टमेंट के लोगों ने उसका बिल भी घर के बिल में जोड़ दिया. जब मैंने बिजली विभाग में बात की तो जब तक उन्होंने मुझसे तीन हजार रुपए रिश्वत नहीं ले नी तब तक मेरा पीछा नहीं छोड़ा. भलाई के काम में भी चोरी.

11. बिजली चोरी – देखा फिर लाइट चली गई. एक घंटे पहले ही तीन घंटे बाद तो लाइट आई थी. उनकी लाइट तो कभी जाती नहीं जो चोरी की बिजली यूज करते हैं. जो बिजली का बिल देते हैं. उनके ऊपर ही इनकी तलवार चलती है. बिजली चोरी करने वाले लोगों की वजह से हमारी लाइट में कटौती की जाती है. विभाग उन पर कार्रवाई क्यों करेगा. जेब जो गर्म करते हैं.
12. दवा में भी मिलावट – अब तो दवा का भी भरोसा नहीं है. कल ही बात है. मैं तुम्हारी भाभी की डायबिटीज की दवा लेकर आया. शुक्र है बेटे की नजर उसकी एक्सपायरी डेट पर पड़ गई. तीन महीने हो चुके थे एक्सपायर हुए. खूब लताड़ा दुकानदार को. कहने लगा कल ही नया स्टॉक निकाला था. अब तुम ही बताओ इन चोरों का क्या किया जाए.
13. रेजगारी – किसी से रेजगारी मांग लो. भाई साहब सच कहता हूं कि नानी मर जाएगी. बस वाला, पान वाला या कोई भी बड़ा शोरूम उसके पास कभी आपको दो से तीन रुपए का बैलेंस वापस नहीं करेगा. दुकानदार तो मझे टॉफी दे देता है. जबकि आरबीआई ने रेजगारी निकालना बंद नहीं किया है.

14. पार्किंग – रोजाना अपने ऑफिस के बाहर अपना स्कूटर पार्किंग पर लगाता हूं. रिस्क भी मेरा. पार्किंग के चौकीदार की कोई गारंटी नहीं. ऊपर से पूरे दिन के 20 रुपए भी दो. एक दिन मैंने पूछ ही लिया अवैध पार्किंग पर इतने महंगे के रेट. तुम्हें शर्म नहीं आती. उसने जवाब दिया कि तुम्हें गाड़ी पार्क करनी है तो करो वर्ना चलते बनो. रेट तो इतना ह देना होगा.
15. हम भी चोर हैं – अब क्या बताउं मुझे तो मैं खुद को भी चोर ही मानने लगा हूं. हम भी तो कुछ रुपए बचाने के चक्कर में सामान का बिल नहीं लेते. अपने घर का एरिया बढ़ाने के लिए सरकारी जमीन को एंक्रोच करते हैं क्या-क्या बताउं? चल भाई चलता हूं. कुछ सामान खरीदना. हां, चोरों से ही मुलाकात करनी है.

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
March 20, 2012

सौरभ जी नमस्कार ! बिलकुल व्यवहारिक और सटीक लेख ! हर आदमी इन परेशानियों से गुजरता है और हर रोज़ फेस करता है ! बहुत बढ़िया लेख !


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