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औजार बिरादरी ने किया बहिष्कार

Posted On: 1 Apr, 2012 Others में

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मामला बहुत संगीन भाई साहब. आज सभी औजारों की महापंचायत है. वरिष्ठता के आधार पर बल्लम बाबा को सरपंच बनाया गया है. धीरे-धीरे औजारों की पूरी बिरादरी पहुंच रही हैं. उम्मीद है कि आधे घंटे में पंचायत की कार्रवाई शुरू हो जाएगी. सूत्रों के अनुसार पिछले एक हफ्ते में मानवों द्वारा की हत्याओं में उनका इस्तेमाल हुआ है. इससे औजार बिरादरी की बदनामी हुई. जिससे सभी औजार काफी आहत हुए हैं. इसलिए महापंचायत का आयोजन हुआ है. कैंची मौसी से लेकर दाव दादा सभी औजार पहुंच चुके हैं. सभी लोग एक दूसरे के साथ कानाफूसी कर रहे हैं. आइए आपको इन सभी की बातों का लाइव टेलीकास्ट पढ़ाते हैं…
छैनी भाभी (हथौड़े से) – कुछ हल निकलेगा इस पंचायत का?
हथौड़ा – बाबा ने कुछ सोच समझकर ही पंचायत बुलाई होगी.
छैनी – पहले भी तो दर्जनों पंचायतें हो चुकी हैं. फिर भी हमारे द्वारा हत्याएं हो रही हैं. अभी तक तुम्हारे मूंह से खून का निशान नहीं गया है.
हथौड़ा – ये तो मैंने जानबूझकर नहीं साफ किया. तुमने देखा नहीं कुल्हाड़ी ने भी तो खून साफ नहीं किया. सिंपेथी भी तो चाहिए. पूरा मीडिया पहुंचा हुआ है.
(उधर कैंची मौसी अपनी धार को मेंटेन करने में लगी हुई है. शायद अभी पार्लर से धार लगवाकर आई हैं. दाव दादा साइड में बैठ गए)
दादा – क्यों मौसी कल तुम्हारे साथ बड़ी ज्यादती हुई है?
मौसी – अरे दादा नमस्ते. आप कब आए?
दादा – बस अभी आया. कल क्या हुआ था?
मौसी – क्या बताएं दादा. लालकुर्ती में मुझे किसी मानव के की छाती में गाड़ दिया. सारी धार खराब हो गई.
दादा – कोई बात नहीं आज सब फाइनल हो जाएगा.
(बल्लम बाबा अपनी मर्सिडीज से उतर मंच की ओर जा रहे हैं. सभी लोगों ने खड़े होकर उनका अभिवादन करके बैठ गए. माहौल पूरा शांत)
बल्लम बाबा – आप सब बैठ क्यों गए? परंपरा भूल गए आप सभी.
(परंपरा रही है कि पंचायत से एक हफ्ता पहले औजारों से मरने वाले लोगों की आत्मा शांति के लिए मौन धारण किया जाता है. सभी ने मरने वालों की आत्मा की शांति के लिए मौन व्रत धारण कर अपने आसन पर बैठ गए. और कानाफूसी करने लगे.)
बाबा – क्यों कुल्हाड़ी मन कुछ शांत हुआ. उस दिन बड़ा रो रहे थे.
कुल्हाड़ी – हां दादा. मगर ये अब रोज की बात हो रही है. पहले मेरा फिर हथौड़े का. अब अब तो कैंची मौसी को भी नहीं छोड़ा.
बाबा – क्यों परेशान होते हो. तुमने कौन सा नया काम किया है. पहले तुम पेड़ों को काटकर भी मानवों को मारने का रास्ता तैयार कर रहे थे. अब तुम डायरेक्ट उनका खून पी रहे हो. चलो देखते हैं. क्यों कैंची बड़ी फ्रेश लग रही हो?
कैंची – बाबा बस अभी धार लगवाई है. बाबा कुछ तो उपाए करिए. हम सभी काफी बदनाम हो रहे हैं. कोई शरीफ आदमी अपने घर रखने को तैयार नहीं है.
हथौड़ा – बाबा मैं और छैनी कभी अलग नहीं होते. उस औरत ने जैसे ही अपने पति के सिर पर मुझे मारा और धड़ाम से मुझे जमीन पर पटक दिया. बड़ा ही अच्छा आदमी था उसका पति. बस आज ही बेल से छूटकर आया हूं.
बाबा – तुम भी तो कुछ बोलो दाव. तुम तो पुराने खिलाड़ी रहे हो.
दाव दादा – ज्यादती तो है बाबा. अब बहुत हो गया. इन बच्चों का दर्द देखा नहीं जाता. (विदुर की तरह कुछ सोचते हुए) मैं तो कहूंगा कि हमें बहिष्कार कर देना चाहिए.
(आरी, दराती, फावड़ा, खुरपा, खंती, चापुन, बिसौली ने हां में सुर मिलाया.)
बाबा – सोचते हुए. दाव कहते तो तुम सही हो. अब बहिष्कार ही करते हैं. अगर उसके बाद भी हमारा दुरुपयोग हुआ तो जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा. अगर किसी को और कुछ कहना है तो अभी बोल सकता है.
(सभी ने सरपंच के फैसले पर हामी भर दी. सभी उठकर जाने लगे. और मीडिया से मुखातिब होने के लिए दाव बाबा, हथौड़ा, चापुन और फावड़ा रुक गए)



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
April 3, 2012

सौरभ जी , आपने अपने व्यंग्य लेख में बहुत कुछ कहने की कोशिश की है ! मैं हंसा तो नहीं हूँ , दुखी जरूर हुआ हूँ ! ये औजार समझ सकते हैं की उनके प्रयोग से लोगों की जान ली जा रही है किन्तु हम मानव ये कब समझेंगे ? बहुत सही परंपरा है , जल्लाद भी इमानदार और कर्तव्यनिष्ठ होना ही चाहिए , ये उसका काम है की वो लोगों की जान लेता है ! सभ्य समाज की दुहाई देने वालों पर तमाचा है आपका लेख !

चन्दन राय के द्वारा
April 1, 2012

Saurabh ji, आपने हर महत्वपूर्ण आंकलन किया है ! बहुत सटीक विश्लेषण और बिलकुल ठीक विचार ! बहुत बेहतर Pls. comment on http://chandanrai.jagranjunction.com/

    Saurabh Sharma के द्वारा
    April 1, 2012

    shukriya chandan ji


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