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ये राजनीति है या सीबीएसर्इ का बोर्ड एग्जाम

Posted On: 11 May, 2017 Politics में

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आप सभी को उपर दिया गया विषय थोड़ा परेशान कर सकता है। क्योंकि बोर्ड एग्जाम से सभी को थोड़ा डर जो जरूर लगता है। जब आप दे रहे होते हैं। उसके बाद जब आपके बच्चे दे रहे होते हैं। खैर मुद्दे पर फौरन आता हूं। देश की राजनीति भी मौजूदा समय में किसी बोर्ड एग्जाम से कम नहीं रह गर्इ है। इसकी सबसे खास बात ये है कि जो सत्ता में है वो इस एग्जाम को देने वाला आैर जो विपक्ष में हैं वो सवाल पूछने वाला। लाजिमी है डर उसी को होता है जो एग्जाम देता है। यही इसकी विलक्षणता भी है कि सत्ता में काबिज होने के बाद इस परीक्षा के सामने सभी पसीने छूट जाते हैं। पिछले तीन सालों की राजनीति को देखा जाए तो कुछ एेसा ही देखने को मिला है। जिसकी तैयारी पूरी है वो पास हो जाता है आैर तैयार नहीं है वो फेल।

चर्चा की शुरूआत वर्षा 2013-14 से करते हैं। सत्ता में काबिज यूपीए सरकार उस अबोध बोर्ड परीक्षार्थी की तरह थी, जिसे विपक्ष सीबीएसर्इ एवं यूपी बोर्ड की भांति कठिन सवाल पूछ रहा था। जिसका जवाब देते यूपीए के बड़े नेताआें के अलावा यूपीए समर्थित प्रधानमंत्री उस नादान आैर भोले बच्चे की तरह चुप था जैसे क्लास टीचर ने उसे डांटकर घर से मम्मी-पापा से रिपोर्ट कार्ड पर सिग्नेचर करवाने के लिए कहा। खैर यूपीए की वो पोजिशन सत्ता में काबिज रहने के करीब 8-9 साल के बाद अार्इ। ट्वीटर आैर फेसबुक जैसे पर्यवेक्षकों को बिठाकर विपक्ष ने सवाल पूछे। सवाल एेसे थे कि जैसे अभी गर्दन को उड़ा देंगे। मैंने क्या किसी ने भी एेसे सवाल पूछने वाले नहीं देखें होंगे। कोर्इ प्रधानमंत्री के कारण एेसे पूछ रहा था, जैसे कोर्इ क्लास में एक बच्चा दूसरे बच्चे का टिफन खाकर चुप हो जाता है आैर क्लास का मोनिटर उससे सवाल करता है। उसमें कोर्इ हद नहीं होती है। क्लास माॅनिटर उस बच्चे का काॅलर पकड़ने के अलावा उस हद को भी पार कर देता है जो क्लास टीचर ने उसे नहीं दी होती है। एेसा करीब उस दौरान एक-सवा साल तक चला। खैर उस समय विपक्ष रूपी परीक्षा बोर्ड ने सत्ता में काबिज उन तमाम बोर्ड परीक्षार्थियों के सेल्फ कांफिडेंस की धज्जियां उड़ा दी।

खैर फ्लैशबैक की बातें काफी बातें हो गर्इ। मौजूदा समय में आते हैं।सत्ता में बीजेपी की सरकार है। जिस सोशल मीडिया पर्यवेक्षकों के बल सत्ता में आए थे, आज वो ही पर्यवेक्षक उनके सामने बैठे हैं आैर कल बोर्ड परीक्षार्थी सवाल लिए बैठा है। अंतर यहां देखिये कि यूपीए सरकार को जिस बोर्ड परीक्षा का सामना सत्ता के रहने के 8-9 साल के बाद करना पड़ा था वो मौजूदा सरकार को सत्ता में आने के २ सालों में करना पड़ रहा है। जो लोग विपक्ष को कमजोर मानकर चल रहे थे उन्हें भी एेसे सवालों की उम्मीद नहीं थी। ताज्जुब की बात तो ये है कि इस बात की ट्यूश्न लेने का वक्त भी नहीं मिला ताकि उनका जवाब सत्ता में बैठे लोग दे सकें। अब जरा सवालों की आेर आते हैं.…

1- कितने करोड युवाओं को रोजगार दिया?
2- गंगा मैया कितनी साफ हुई?
3- बुलेट ट्रेन के कितने कोच तैयार हुए?
4- मेक इन इंडिया का क्या परिणाम रहा?
5- कितने दागी नेता जेल गए?
6- धारा 370 पर क्या हुआ?
7- कितने कश्मीरी पंडितों को उनके घर मिले ?
8- डीजल पैट्रोल कितने सस्ते हुए ?
9- मंहगाई कितनी कम हुई?
10- आम जनता के लिए क्या किया गया?
11- लाहौर और करांची पर कंहा तक कब्जा किया?
12- सेना को कितनी छूट दी गई?
13- चीन थर थर कांपा क्या?
14- देश ईमानदार देशों की श्रेणी में आया क्या?
15- किसानों की फांसी बंद हुई क्या?
16- जवानों का खाना सुधरा क्या?
17- बिहार को 125 लाख करोड़ का पैकेज दिया क्या?
18- अलगाववादी नेताओं की सुविधाएं बंद की क्या?
19- ओवैसी और वाड्रा जेल गए क्या?
20- मोदी के विदेशी दौरों से कुछ फायदा हुआ क्या?
21- राम मन्दिर बना क्या?
22- गुलाबी क्रांति गौ हत्या रुकी क्या?
23- डॉलर का मूल्य रूपये के मुकाबले कम हुआ क्या?
24- कितने स्मार्ट सिटी तैयार हो गये?
25- कितने गाँवों की काया पलट हुई संसादों के गोद लेने से?
26- महिलाओं पर अत्याचार रुक गया क्या?
27- बीफ एक्सपोर्ट में भारत को एक नम्बर किसने बनाया?
28- 100 दिनों के अंदर विदेशों से काला धन आया क्या?
29- कितने लोगों को 15 लाख मिले?
30- नोटबन्दी से आतंकवाद और नक्सलवाद का कमर टूटा क्या?
31- देश के अंदर से घूसखोरी बंद हो गई क्या?
32- भारत में कितनी खुशहाली आई?
33- स्वच्छता अभियान का क्या परिणाम रहा?

ये सवाल इसलिए जरूरी हैं क्योंकि देश की जनता रूपी बोर्ड की काॅपी चेक वाले टीचर्स के उस पैनल ने अच्छे नंबर्स देकर सत्ता में बिठाया था, जो उनके हर सवाल का जवाब होगा। लेकिन अभी तक उन्हें इन सवालों के जवाब का इंतजार है। इस क्लास का सबसे होशियार बच्चा जो मुहावरों के अलावा बोलने में, पढ़ने में, खेल में, बात करने में, दोस्त बनाने में, तारीफ पाने आैर करने में अव्वल है वो कुछ नहीं कर रहा मौन है। हमें उम्मीद है कि इन सवालाें का जवाब जरूर मिलेगा। अगर नहीं मिला तो देश की जनता समझदार है कुछ आगे कहने की जरुरत नहीं। जय हिंद, जय भारत।



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashokkumardubey के द्वारा
June 16, 2017

सबसे पहले आपको बेस्ट ब्लागर की बधाई .अब बात मुद्दे के करें क्या आपको लगता है की केवल वर्तमान सरकार ही जनता से किये वायदे पूरा नहीं कर रही है या इसके पहले भी सरकारें रहीं हैं उन्होंने भी यही किया है आखिर इस सवाल का जवाब तो मिलना ही चाहिए की चुनाव प्रचार के दौरान पार्टियां एवं नेता जो देश की जनता को झूठे सपने दिखा कर, झूठे वायदे करके जनता का वोट प्राप्त कर जीत जाते हैं उनपर किसका नियंत्रण है ? जनता का या चुनाव आयोग का और क्या चुनाव आयोग या जनता इसके लिए कुछ कर पाती है ,भाई साहब यही लोकतंत्र है अतः आगे भी केवल नेता वायदे करेंगे और जीत कर सरकार पर काबिज हो जायेंगे और राज भोगेंगे इसका कुछ नहीं होने वाला क्रिकेट मैच की तरह कभी यद् जीता कभी वह जीता और शील्ड ले गया .


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